होली के पौराणिक लोकगीत – Holi Lokgeet Hindi

होली के पौराणिक लोकगीत – Holi Lokgeet Hindi होली खेलन आया श्याम होली खेलन आया श्याम आज इसे रंग में बोरो री | कोरे-कोरे कलश मँगाओ, केसर घोलो री मुख पर इसके मलो, करो काले से गोरा री || होली खेलन ——— पास-पड़ोसन बुला, इसे आँगन में घेरो री पीतांबर लो छीन, इसे पहनाओ चोली… Continue reading होली के पौराणिक लोकगीत – Holi Lokgeet Hindi

होरी खेलत राधे किसोरी lyrics | होली के पौराणिक लोकगीत

होरी खेलत राधे किसोरी lyrics | होली के पौराणिक लोकगीत होरी खेलत राधे किसोरी बिरिजवा के खोरी। केसर रंग कमोरी घोरी कान्हे अबीरन झोरी। उड़त गुलाल भये बादर रंगवा कर जमुना बहोरी। बिरिजवा के खोरी। लाल लाल सब ग्वाल भये, लाल किसोर किसोरी। भौजि गइल राधे कर सारी, कान्हर कर भींजि पिछौरी। बिरिजवा के खोरी।

आज बिरज में होली रे रसिया lyrics | होली के पौराणिक लोकगीत

आज बिरज में होली रे रसिया lyrics | होली के पौराणिक लोकगीत आज बिरज में होली रे रसिया, होली रे रसिया, बरजोरी रे रसिया। उड़त गुलाल लाल भए बादर, केसर रंग में बोरी रे रसिया। बाजत ताल मृदंग झांझ ढप, और मजीरन की जोरी रे रसिया। फेंक गुलाल हाथ पिचकारी, मारत भर भर पिचकारी रे… Continue reading आज बिरज में होली रे रसिया lyrics | होली के पौराणिक लोकगीत

होरी खेलैं राम मिथिलापुर मा lyrics | होली के पौराणिक लोकगीत

होरी खेलैं राम मिथिलापुर मा lyrics | होली के पौराणिक लोकगीत मिथिलापुर एक नारि सयानी, सीख देइ सब सखियन का, बहुरि न राम जनकपुर अइहैं, न हम जाब अवधपुर का।। जब सिय साजि समाज चली, लाखौं पिचकारी लै कर मां। मुख मोरि दिहेउ, पग ढील दिहेउ प्रभु बइठौ जाय सिंघासन मां।। हम तौ ठहरी जनकनंदिनी,… Continue reading होरी खेलैं राम मिथिलापुर मा lyrics | होली के पौराणिक लोकगीत

सरयू तट पर होली lyrics | होली के पौराणिक लोकगीत

सरयू तट पर होली lyrics सरजू तट राम खेलैं होली, सरजू तट। केहिके हाथ कनक पिचकारी, केहिके हाथ अबीर झोली, सरजू तट। राम के हाथ कनक पिचकारी, लछिमन हाथ अबीर झोली, सरजू तट। केहिके हाथे रंग गुलाली, केहिके साथ सखन टोली, सरजू तट। केहिके साथे बहुएं भोली, केहिके साथ सखिन टोली, सरजू तट। सीता के… Continue reading सरयू तट पर होली lyrics | होली के पौराणिक लोकगीत

अवध मां होली खेलैं रघुवीरा lyrics | होली के पौराणिक लोकगीत

अवध मां होली खेलैं रघुवीरा lyrics | होली के पौराणिक लोकगीत ओ केकरे हाथ ढोलक भल सोहै, केकरे हाथे मंजीरा। राम के हाथ ढोलक भल सोहै, लछिमन हाथे मंजीरा। ए केकरे हाथ कनक पिचकारी ए केकरे हाथे अबीरा। ए भरत के हाथ कनक पिचकारी शत्रुघन हाथे अबीरा।