Lyrics in Hindi – मैं एक क्लर्क हूँ – क्लर्क lyrics | क्लर्क – मैं एक क्लर्क हूँ lyrics in Hindi

सूरज उगते मैंने न देखा
चाँद चमकते मैंने न देखा
सूरज उगते मैंने न देखा
चाँद चमकते मैंने न देखा

मैंने न देखि खुसी कबी भी
और खुसियो ने मुझे न देखे
सब ग़म हैं मेरे
मैं ग़म का हूँ
पल पल जिउ और पल पल मरू
क्योंकि मैं एक क्लर्क हूँ
मैं एक क्लर्क हूँ
मैं एक क्लर्क हूँ

सब ग़म हैं मेरे
मैं ग़म का हूँ
पल पल जिउ और पल पल मरू
क्योंकि मैं एक क्लर्क हूँ
मैं एक क्लर्क हूँ

सुने माँ ने कभी खसया था
हा लोरिया दे कर कभी सुलाया था
सुने माँ ने कभी खसया था
हा लोरिया दे कर कबि सुलाया था
अब माँ भी जगे मैं भी जागु
और कही नशीबा सोया था
और कही नशीबा सोया था
भाई बहन की फीस का खर्चा
बना के रख दे चरखा
हाथ फैलाकर यार भी देखा
दिल के ये दुखडे कैसे कहु
कांटे चुनु क्योंकि मैं एक क्लर्क हूँ

जिन दिनों मैं सोल्लगे में पढता था
उन दिनों कोई मुझ पे मरता था
इक रूप की रानी प्रेम में पागल
संग देख के कोल्लगे जलता था
संग देख के कोल्लगे जलता था
फिर मिली क्लेरकी पर लड़की रूठी
वो रूप की रानी दौलत पर फूटी
किसी और की हो गयी रूप बदल के
सपनो की तरह थी वो भी जूठी

सपनो से अब मैं डरता रहूँ
टूटा हुआ दिल न जोड़ सकूं क्योंकि
मैं एक क्लर्क हूँ

बसो की लम्बी लाइन में लगकर
तह क टुथ कर मैं घर में आता हूँ
हो ओ बसो की लम्बी लाइन में लगकर
तक टुथ कर मैं घर में आता हूँ
एक कमीज जो तन ढकती है
उसे साबुन बिन डुलाता हूँ
उसे साबुन बिन डुलाता हूँ
फिर माँ चुपके से आती हैं
और ताली में  आंसू लाती हैं
भीगी खाली थाली मुझको
बनिए का कर्जा जताती हैं
रोने तो आये मैं हंस पदु
रोटी न हो तो मैं आंसू पियु
क्योंकि मैं एक क्लर्क हूँ
मैं एक क्लर्क हूँ

सब ग़म है मेरे
मैं ग़म का हूँ
पल पल जिउ और पल पल मरू
क्योंकि मैं एक क्लर्क हूँ
मैं एक क्लर्क हूँ
मैं एक क्लर्क हूँ.

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