ले अम्बे नाम चल रे Le Ambe Naam Chal Re Lyrics in Hindi

ले अम्बे नाम चल रे Le Ambe Naam Chal Re Lyrics in Hindi

पावन है सबसे ऊँचा है साँचा है ये दरबार
कलयुग में भी होते है जहाँ रोज़ चमत्कार
ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे
ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे

(संगीत)

सुन्दर से माँ के धाम की महिमा कमाल है
मंदिर यह देवी माँ का सबसे विशाल है
पर्वत त्रिकूट के शीश पे माता का सिंहासन
जयकारे माँ के बोल के चलती यहाँ पवन

अम्बर के बादल देते है माता को सलामी
पहरा दे हनुमान और भैरव करते निगरानी
दर्शन की सबके भाग में घड़ियाँ नहीं आती
दर्शन उन्हें मिलता जिन्हे माँ भेजती बाती

द्वारे पे माँ के लगती लम्बी कतार है
दर्शन कब होगा सबको इंतज़ार है
जीवन है जिसका नाम वो है कच्चा सा धागा
जो माँ के द्वारे जा न सके वह है अभागा

ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे
ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे

(संगीत)

सूरज की पहली किरण होती है जो सिंधुरी
कहती है पता माँ को है मजबूरियाँ तेरी
क्या सोच रहा तू कि ये पैसा है जरूरी
पैसे ने बना राखी है माँ-बेटे में दूरी

इस पाप कि गठरी को परे रख के तू आजा
आजा तू खुला है भवानी माँ का दरवाज़ा
मील अठ्ठाराह ये जम्मू से दूर है
दर्शन जो माँ का पहला जग में मशहूर है

कन्याओं के संग माता यहाँ खूब थी खेली
इस स्थान को कहते है भक्तों कौली-कंदौली
ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे
ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे

(संगीत)

यहाँ से चार मील जब आगे जाओगे
दर्शन जो माँ का दूजा है उसको पाओगे
दुर्गा कि एक भक्त जिसका नाम था देवा
करती थी सच्चे मन से सदा मैया कि पूजा

दर्शन उसे देने को इक दिन आयी थी माई
तब से ये जगह बन गई भक्तो देवामायी
रस्ता बताऊँ सबको तेरा वैष्णो रानी
हो जाये कोई भूल क्षमा करना भवानी

माता कि जय-जयकार होती कटरा धाम पे
होती यहाँ सुबह है जय माता के नाम से
ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे
ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे

(संगीत)

गिनता नहीं जो राह में कितनी लगी ठोकर
जाता है माँ के द्वार से वो झोलियाँ भरकर
तुम यात्रा से पूर्व यहाँ पर्ची कटाना
जयकारा माँ का बोल के फिर यात्रा करना

पर्ची जो कटाई है इसे ध्यान से रखना
ऊपर भी जांच होगी इसे खो नहीं देना
बच्चे है छोटे, वृद्ध या ना जा सके चलकर
उनके लिए मिलते है यहाँ भाड़े पे खच्चर

खच्चर पे भी न बैठ सके जिसकी अवस्था
उनके लिए यहाँ है पालकी कि व्यवस्था
ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे
ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे

(संगीत)

कटरा से थोड़ी दूर है मशहूर ये मंदिर
कहते है सारे इसको यहाँ भूमिका मंदिर
माता के परम भक्त जिनका नाम था श्रीधर
करते थे माँ का ध्यान सुबह-शाम जो अक्सर

रहता था उनके मुख में सदा मैया का वर्णन
कन्या का रूप धार दिए माता ने दर्शन
कहने लगी कर भक्त भंडारे का आयोजन
आस-पास जाके दे आ सबको निमंत्रण

देने निमंत्रण भोज का वो सबको चल पड़े
रस्ते में भैरव संग कुछ साधू उन्हें मिले
बोले श्रीधर, ‘हे! बाबा कल मेरे घर आना
भंडारा माँ का कर रहा हूँ भूल ना जाना’

ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे
ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे

(संगीत)

अगले दिन प्रातः काल से श्रीधरजी के घर पर
आकर इकठ्ठा होने लगी भीड़ भवन पर
भैरो नाथ आये, गौरख नाथ जी आये
दोनों के संग उनके कई शिष्य भी आये

भोजन मिलेगा आज सभी जन थे प्रसन्नचित्त
किन्तु बिना कन्या के हुए श्रीधर चिन्तित
इतने में लिए हाथ कमंडल माँ पधारी
वो दिव्य कन्या लग रही थी सबको ही प्यारी

देने लगी कमंडल से सबको वो भोजन
ये देखकर के श्रीधरजी का प्रसन्न हो गया था मन
ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे
ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे

(संगीत)

आयी वो देने भोजन जब भैरव के पास
वो कहने लगा चाहिए मदिरा व मुझे मांस
बोली वो कन्या, “योगी जी ब्राह्मण के द्वार से
जो कुछ भी आपको मिला स्वीकारो प्यार से”

कन्या को पकड़ने लगा वो विनती न माना
कन्या भी हो गई तुरंत तब अन्तर्ध्याना
देखा उसे भैरव ने अपने विद्या-योग से
वो पवन-रूप धार चली त्रिकूट ओर है

इस दिव्य कन्या को चला तब भैरव पकड़ने
वो मूढ़-मति उसका पीछा लगा करने
ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे
ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे

(संगीत)

ये भूमि का मंदिर वही तो स्थान है
भोजन खिलाया सबको कन्या रूप मात ने
यहाँ से डेढ़ मील जब आगे जाओगे
तो रास्ते में दर्शनी दरवाज़ा पाओगे

माँ के भवन का मिलता यहाँ पहला नज़ारा
सब भक्त लगते है यहाँ आके जयकारा
माता का भैरव नाथ ने जब पीछा किया था
उस वक्त माँ के साथ-साथ वीरलंगूर था

जिस जगह के प्यास ने लंगूर को सताया
माता ने पथरो में यहाँ तीर चलाया
ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे
ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे

(संगीत)

लगते ही बाण निकली जो जल कि धरा
वो धरा यही है जिसे कहते’ बाण गंगा’
माता ने इसमें केश धोके उनको संवारा
इस कारण इसका नाम दूजा है ‘बाल गंगा’

आगे जो चलोगे रोम-रोम खिलेगा
बाण गंगा से जो पार करे पुल वो मिलेगा
पुल के करीब ही है एक माता का मंदिर
करते है कई भक्त यहाँ स्नान भी रूककर

होता है यहाँ से ही शुरू सीढ़ी का रास्ता
इसकी बगल से जा रहा इक कच्चा भी रास्ता
माँ अम्बे नाम लेके पौढ़ी-पौढ़ी चढ़ो जी
शर्माओ न सब मिलके जय माता की कहो जी

ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे
ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे

(संगीत)

माता कि धुन में खोके के जो चलता चला गया
बिन मांगे माँ के द्वारे से मिलता चला गया
होगा ये चमत्कार भी मैया के नाम से
जैसे चढ़ाये पौड़ी माँ बाँहों को थाम के

आता है वो स्थान जहाँ माँ के श्रीचरण
इक शिला पर बने है छू लो ये श्रीचरण
माता ने पीछे मुड़कर इस स्थान से देखा
इस कारन इसको कहते है ‘चरण-पादुका’

भैरो है कितनी दूर ये अंदाज़ा लगाया
फिर इसके बाद माँ ने कदम आगे बढ़ाया
ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे
ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे

(संगीत)

है आदि-भवानी माँ शक्ति चमत्कारी
जिसने ये चरण छू लिए तकदीर संवारी
मस्तक झुकालो प्रेम से भक्तो चले आओ
जो कुछ भी चाहते हो माँ के द्वार से पाओ

आएगा भवन जिसकी बड़ी शान है न्यारी
इस स्थान को कहते है सभी ‘आधकुंवारी’
‘गर्भजून’ जिसका नाम है वो गुफा यही है
भवानी माँ इस गुफा में नौ माह रहीं है

जैसे ही भैरो नाथ गुफा द्वार पर आया
तब सामने उसने लंगूर वीर को पाया
ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे
ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे

(संगीत)

करने लगा लंगूर युद्ध भैरव नाथ से
पर्वत भी जिसको देख लगे भय से कांपने
लंगूर ने लाख रोका भैरव बाज़ न आया
तब माँ ने तंग आके त्रिशूल चलाया

जाकर के शीश उसका गिरा दूर घाटी में
और धढ़ उसका आन गिरा माँ के चरण में
तब भैरो यह कहने लगा के “हे !महामाया
हाथों से तेरे अंत हुआ चण्ड का माया”

“होते कपूत पूत पर न माता कुमाता
करदे मुझे क्षमा हे! जगदीश्वरी माता”
ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे
ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे

(संगीत)

तूने क्षमा किया न तो मैं पापी रहूंगा
और आदिकाल सबकी ही निंदा सहूंगा
उसके वचन से माता का दिल-ही पिघल गया
करुणा वाली के मुख से वचन ये निकल गया

करती हूँ क्षमा आज तेरे पाप मैं भारी
देती हूँ वचन तू बनगे मोक्ष अधिकारी
आते समय जब लोग मेरी पूजा करेंगे
मेरी पूजा के बाद तेरी पूजा करेंगे

तूने मुझे माता कहा है जग भी कहेगा
बच्चो के जैसा सबसे मेरा नाता रहेगा
दर्शन के मेरे बाद जो न तुझको पूजेगा
उसको मेरे दर्शन का कभी फल ना मिलेगा

ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे
ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे

(संगीत)

पर्वत है एक और दूजी और है खाई
चढ़ना ज़रा संभल हाथी मथे की चढ़ाई
परेशान न होना तू देख पाँव के छाले
कष्टों से ही खुलते है नसीबो के भी ताले

चढ़कर के जो हाथीमत्थे से जब पार आओगे
तुम भक्तो खुद को सांझी-छत पे पाओगे
भक्तो है शुरू होती उतराई यहाँ से
जिव्हा करेगी माँ की जयकार यहाँ से

आता है इसके बाद वोह द्वार आनेका हमे
मीलो चले आये है सब जिसकी चाह में
ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे
ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे

(संगीत)

कुछ खालो-पीलो थोड़ा सुस्तालो कुछ घड़ी
दर्शन की आने वाली है पवन वो शुभ घड़ी
दर्शन से पहले करलो स्नान यहाँ पर
रुक जाती जैसे सांस शीतल जल पड़े तन पर

स्नान जिनमे किया वे सब वस्त्र त्याग दे
कोरे जो वस्त्र पास में है वोह तन पे धारले
अबतक नहीं गए है वो ध्यान दे इस पर
मिलता है यहाँ दर्शन का आपको नंबर

भक्तो के लिए कमरे बने यहाँ आरक्षित
सामान जमा होता जहाँ सबका सुरक्षित
ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे
ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे

(संगीत)

कुछ ऐसा नज़ारा है थकते नहीं नयन
लगता है स्वर्ग जैसा अम्बे तेरा भवन
मिलती है भवन पे सारी पूजा की सामग्री
लहरा रही है हर तरफ लाल ही चुनरी

मैया की चुनरी है प्रेम से तुम सिर पे बाँध लो
और नारियल बहार ही अपना जमा करो
मंदिर के बाहर भक्तो की लगती लम्बी क़तार है
बारी कब आएगी सबको ये इंतज़ार है

संकरा है भवन द्वार बढ़ो आधा लेटकर
ये द्वार ही है भैरो का शीश कटा धढ़
ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे
ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे

(संगीत)

पिंडी दरश से पहले भी एक स्थान पर
पंजे बने है शेर के एक शिला पर
आता है अब वो दृश्य मैं कैसे करू वर्णन
होता है पिंडी रूप में महामाई का दर्शन

आदर से माथा टेकना तुम माँ के चरण पर
खुलने में नसीबा नहीं लगता है प भर
पूजसामग्री लाये हो वो सारी चढ़ा दो
जिस-जिस का चढ़ावा है उसे आदर से चढ़ा दो

बैठी है काली माता सरस्वती साथ में
जलती है माँ की ज्योति बिना तेल बाती के
माँ करती क्षमा छोटी-बड़ी सारी भूल भी
इक और धरा देखोगे माँ का त्रिशूल भी

ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे
ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे

(संगीत)

अब माँ की आज्ञा को है हमने निभाना
दर्शन के लिए भैरो के मंदिर भी है जाना
मिलते है पुष्प मिलती धूपः बाती है यहाँ
काला धागा भी मिलता है भैरो नाम का यहाँ

घाटी में दूर जाके बना भैरव का मंदिर
मंदिर में पड़ा है भैरव का कटा हुआ सिर
श्रद्धा दे धुप बाती भैरव पे चढ़ाना
आदर से हाथ जोड़ के तुम सिर को झुकाना

माता के पुण्य धाम की यह यात्रा सारी
पूरी करे भवानी मैया कामना तेरी।
ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे
ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे
ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे
ले अम्बे नाम चल रे, चल वैष्णो धाम चल रे

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