बहारों फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है

बहारों फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है

बहारों फूल बरसाओ
मेरा महबूब आया है – (२)
हवाओं रागिनी गाओ
मेरा महबूब आया है – (२)

ओ लाली फूल की मेंहँदी लगा इन गोरे हाथों में
उतर आ ऐ घटा काजल, लगा इन प्यारी आँखों में
सितारों माँग भर जाओ
मेरा महबूब आया है – (२)

नज़ारों हर तरफ़ अब तान दो इक नूर की चादर
बडा शर्मीला दिलबर है, चला जाये न शरमा कर
ज़रा तुम दिल को बहलाओ
मेरा महबूब आया है – (२)

सजाई है जवाँ कलियों ने अब ये सेज उल्फ़त की
इन्हें मालूम था आएगी इक दिन ऋतु मुहब्बत की
फ़िज़ाओं रंग बिखराओ
मेरा महबूब आया है – (२)
बहारों …

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