पलकों पे चलते चलते – दायरा lyrics | दायरा – पलकों पे चलते चलते lyrics in Hindi

पलकों पे चलते चलते
जब उन्हें लगती हैं
सो जाके सोती हैं तो
उड़ने लगती हैं
पलकों पे चलते चलते
जब उन्हें लगती हैं
सो जाके सोती हैं तो
उड़ने लगती हैं
सोंधे से आकाश पे
नीले बाज़ारे बहाते हैं
आँखें जैसी आँखें
सपने चुभने लगती हैं

पलकों पे चलते चलते
जब उन्हें लगती हैं
सो जाके सोती हैं तो
उड़ने लगती हैं
सोंधे से आकाश पे
नीले बाज़ारे बहाते हैं
आँखें जैसी आँखें
सपने चुभने लगती हैं

पीगली हुयी हैं गीली चाँदनी
काची रात का सपन आये
थोड़ी सी जागी थोड़ी सोयी
नींद में कोई अपनाये
नींद में हलकी खुसबूये सी
घुलने लगती हैं
सो जाके सोती हैं तो
उड़ने लगती हैं
सोंधे से आकाश पे
नीले बाज़ारे बहाते हैं
आँखें जैसी आँखें
सपने चुभने लगती हैं

आँखों से केहना लोरी में बहना
रातों का कोई चोर नहीं
तेरे तो और भी होंगे सपने
मेरा तो कोई और नहीं
बोलती आँखें नींद में
सपने सुनाने लगती हैं
सो जा आँखें सोती हैं तो
उड़ने लगती हैं
सोंधे से आकाश पे
नीले बाज़ारे बहाते हैं
आँखें जैसी आँखें
सपने चुभने लगती हैं

सो जा आँखें सोती हैं तो
उड़ने लगती हैं
सोंधे से आकाश पे
नीले बाज़ारे बहाते हैं
आँखें जैसी आँखें
सपने चुभने लगती हैं.

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