आज बिरज में होली रे रसिया lyrics | होली के पौराणिक लोकगीत

आज बिरज में होली रे रसिया lyrics | होली के पौराणिक लोकगीत

आज बिरज में होली रे रसिया,

होली रे रसिया, बरजोरी रे रसिया।

उड़त गुलाल लाल भए बादर,

केसर रंग में बोरी रे रसिया।

बाजत ताल मृदंग झांझ ढप,

और मजीरन की जोरी रे रसिया।

फेंक गुलाल हाथ पिचकारी,

मारत भर भर पिचकारी रे रसिया।

इतने आये कुंवरे कन्हैया,

उतसों कुंवरि किसोरी रे रसिया।

नंदग्राम के जुरे हैं सखा सब,

बरसाने की गोरी रे रसिया।

दौड़ मिल फाग परस्पर खेलें,

कहि कहि होरी होरी रे रसिया।

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